जीवन में अपार संभावना है ?-change your life completely

बहुत लोग ऐसे होते है जो अपने जीवन से थक जाते है. उसे जीवन एक बोझ लगने लगता है. कभी कभी तो ये भावना इतनी बढ़ जाती है की उसे अपना जीवन ही बेकार लगने लगता है. उसे लगता है की वह जीवन में कुछ नही कर पायेगा.

जीवन में निराशा आती है -disappointed in life

अच्छे अच्छे लोगो को भी ऐसा महसूस होता है. उसको अपने आप पर भरोसा ही नही रहता. उसे ये भी नही मालूम होता की उसे क्या करना है ? क्या करे तो उसे आनंद मिले ये बात उसे मालूम ही नही होती.

बस केवल जीवन को जिए जाते है या यु कहो की केवल जीवन का भार उठा रहे हो !! उनका जीवन निराशा से भर जाता है. अपने आप से ही वह थक जाते है. आगे हम उनके कारण, परिणाम और उनको दूर करने के उपाय भी बतायेगे.

वाकई क्या ये सच है ?

वास्तवमे क्या सच में हमारा जीवन बेकार है ? ये बिलकुल सच नही है ! क्योंकी जो कोई भी अपने जीवन को व्यर्थ मानते है उसे ये मालूम ही नही, की उसमे कितनी सारी सम्भावना छिपी हुई है. एक बिज में वट वृक्ष बनने की संभावना है.

हमारे शरीर की रचना देखे तो भी आपको पता चलेगा की उसमे कितनी सारी रचना की गई है. हमे ख़ुशी और आनंद का अहेसास देने के लिए एक बड़ा जीवन तैयार किया गया है.

आखो की रचना, हमारे कान, मधुर रस का स्वाद लेती ये जिव्हा ! हमे इधर से उधर ले जाने वाले ये पैर ! हमारे हाथ जो तरह तरह के काम कर शकते है. अगर हमारे शरीर की अनगिनत रचना के बारेमे सोचना शुरू करे तो हम इश्वर के प्रति कृतज्ञ होगे.

एक गिनती के मुताबिक ये पुरे शरीर की कीमत ३० करोड़ से भी ज्यादा है ! इतना पैसा देने के बाद भी ऐसा शरीर नही मिलता. मतलब की ये अमूल्य है.

उसमे भी जो हमे अहेसास होता है वह तो दुनिया की कोई मशीन को नही होता ! हम जो आनंद महसूस कर शकते है वैसा आनंद रोबट महसूस नही कर शकता. वह तो केवल एक प्रोग्राम के तहत ही कार्य करता है.

अपने जीवन को पहचान कर उसे सही दिशा में लगायेlive your best life

अब इतना बड़ा और जटिल शरीर दिया है तो उनका कुछ तो उदेश होगा न ? हम सब जानते है की परमात्मा ने बहुत सारे ऐसे जटिल रचना वाले जीवन बनाये है. हमे कभी कभी तो ऐसा भी लगता है की उनकी क्या जरूरत थी ?

लेकिन फिर भी बनाये है या बनते जाते है अपने आप ! आप जो भी कहे लेकिन ये जगत को पूर्ण बनाने के लिए है. उन सबमेभी मनुष्य के पास जो बुध्धि की देंन है वह तो एक बड़ा आशीर्वाद है उसे अभिशाप में नही बदलना चाहिए. मतलब की अगर कोई अपने जीवन को कोशे या गलत दिशा में व्यतीत करे तो ये उसी रचना की अवहेलना होगी !

इन शोर्ट अपने ये शरीर और अपने जीवन का मूल्य पहचानिये तब ही आपका विकास सम्भव है.

क्यों की जिसे अपने आप पर भरोसा नही होता उसे किसी पर भरोसा नही होता. निरासा तब तक दूर नही होती जब तक हम ये मान न ले की में कुछ कर शकता हु. एक बार में निष्फल हुवा तो क्या हुवा !! क्या मेरा जीवन ही चला गया ऐसा तो नही है न !.

में अगर सोचु अगर में सही दिशा में कार्य करू तो बहुत कुछ कर शकता हु ! हम प्रशन्न रह शकते है फिर भी हम परेशान दिख रहे है अपने आप को कमजोर मान रहे है.

जीवन में बहुत सारी संभावना है-Possibility in life

जीवन को अपार सम्भवना से भरा देखना चाहिए. अगर एक बार नींद में जीना शिख गये तो दुनिया की कोई ताकत आपको जगा नही पायेगी. क्योकि व्यक्ति तब तक कुछ करने के लिए उठ खड़ा नहीं होता जब तक वह अपने आप पर भरोषा रखके कुछ करने की न सोचे !

एक हौसला रखिये की में जरुर कर पाउगा. मुझे करना ही है. में हर हाल में करुगा. हमने बहुत सारे महान कार्य करते हुवे लोगो को देखा है. वह इसीलिए आगे है क्योकि उसने अपना समय योग्य तरीके से लगाया है.

आपको जो मिला है वही समय उसी को भी मिला था ! लेकिन उसने अपना यही समय एक ही दिशा में लगा दिया और परिणाम तो आपके सामने आया.

अगले पल का आयोजन-how to do planning in our life ?

जीवन के अगले पल पर क्या करना है वह निश्चित कीजिये !! मतलब की पुरे जीवन की कोई टाइम टेबल अभी से मत बनाये !

क्योकि आप उसमे उलज जायेगे और आपको ऐसा लगने लगेगा की अरे में अभी तक सफल क्यों नही हुवा ? जितना लम्बा समय का आयोजन उतनी टेंशन और उलझन ज्यादा !

और उसमे भी अगर अपनी इच्छा अनुसार नही मिला तो एक प्रकार का असंतोष मन में उभर कर आये वह अलग !

आप केवल अपने नजदीक के पल पर ही ध्यान दे ! फिर उस पल के बाद उस पल के बाद वाले पल पर ध्यान दे ! उस तरह से पल पल जुडके आपका पूरा जीवन एक दिव्य ध्येय के प्रति समर्पित हो जायेगा. आनंद के बारेमे भी ऐसा ही है कुछ ! आप को अगर पूरा जीवन आनंदित रहना है तो आप को अपने कार्य में वयस्त होते हुवे हर पल आनंद में रहना है.

कार्य करते हुवे अगर कोई आनन्दित रहने लगा तो समज लो उनका जीवन आनंद से भर गया !!

समय का सदुपयोग -use your time in proper way

कल का जीवन आज के जीवन का ही फल है. अगर आपका आज अस्तव्यस्त है तो कल भी ऐसा ही होगा क्योकि एक के बाद एक ऐसे आता है. यहा पर कोई कोई लोग ऐसा भी कहते है की बचपन में कोइ शरारती था फिर भी वह बड़ा होके आगे बढ़ गया.

तो उनके उत्तर यह है की उसने अपनी शकती जो शरारत करने में व्यतीत करता था वह अब कोई प्रोपर कार्य में लगा दी. कहने का मतलब बहुत ही साफ है की आप आज upset है और लम्बे समय तक ऐसे ही रहे तो कुछ बन नही पड़ेगा

लेकिन अगर आप बीते दिनों को भूल जाये और अपने जीवन में बहुत सारी संभावना छिपी हुई है ऐसा मान कर आगे बढने लगे तो धीरे धीरे आपका विकास निश्चित ही होगा उनमे कोई शंका नही. मन का एक घेरा ही सब कुछ करता है.

अगर इस विपरीत घेरे में आप फसते चले गये तो फिर धीरे धीरे निराशा ही हाथ लगेगी. इसलिए जैसे ही ऐसे कोई विचार हावी हो की तुरंत सतर्क होकर कोई भी कार्य में लग जाना चाहिए. उनके फल के बारेमे सोचना नही. चाहे हम कितने भी निष्फल क्यों न हुए हो.

एक बात याद रखने जैसी है की एक बार मिली निष्फलता ही अंतिम नही नया पड़ाव जीवन में आएगा ही.

ज्यादा सोचने की बीमारी से बाहर निकलिए- stop over thinking

आज कल एक बहुत बड़ी समस्या उभरके आई है और वह है ज्यादा सोचने की बीमारी. सोच का दायरा और जीवन में समस्या इतनी बढ़ गई है की लोग ज्यादा से ज्यादा समय सोचने में ही बिता देते है. एक बार ये आदत लग गई फिर धीरे धीरे मन एक लूप में चला जायेगा ये लूप अगर निराशा का हो तो फिर जीवन ही बोर लगने लगेगा.

इस समस्या से निपटने के लिए हमे बस अपने अगले कदम पर ध्यान देते हुवे कार्य ही करते रहना है. अपने पुरे दिन को एक टाइम टेबल के अनुसार जकड़ दो और उसमे ध्यान, अद्रैत धारणा का समावेश भी होना चाहिए. ध्यान के दौरान कोई सोच में न डूब जाओ वरना उस सोच का ध्यान लग जायेगा.

पूर्व धारणा से बाहर निकलिए-Reducing prejudice

आप को पूर्वधारणा से बाहर निकलना चाहिए. क्योकि पूर्वधारणा एक बीमारी की तरह है. वह एक निश्चित घेरे में हमारे विचारो ओर माइंड को घेर लेता है की हम दूसरी दिशा में सोच ही नही शकते. किसी व्यक्ति के प्रति पूर्वधारणा हो गई हो तो वह कितना भी प्रयास करे हमे उन पर विश्वास ही नही आता. उनके अच्छे कार्य में भी हमे संदेह होता है.

इसी तरह से यहा भी होता है की हम एक स्थिति में अगर सफल न हो पाए या हमे निराशा मिली तो एक धारणा करके हम बैठ जाते है फिर आगे प्रयास करना भी छोड़ देते है. हमारा पूरा जीवन थम्भ जाता है. उनमे कोई गति नही रहती इसलिए ऐसी स्थिति का माहोल खड़ा न हो इसलिए हमे निराशा से बाहर निकलकर आशा से भर जाना है और आगे बढना है.

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