जवानी में असली ताकत के लिए ये करे !-brahmacharya ka palan kaise kare

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हमारा आजका subject है ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करे ?. वर्तमान समय को देखते हुवे ये जरा किसीको अजीब भी लगे. क्योकि ज्यादातर ये शब्द उन संस्यासी के लिए है, जो घर छोड़ देते है और सन्यास ले लेते है. लेकिन ये ब्रह्मचर्य सामान्य मनुष्य के लिए भी बहुत ही मूल्यवान है.

ब्रह्मचर्य के इतने लाभ है की कई युवान आज दो साल, तिन साल तक का ब्रह्मचर्य का पालन करने लगे है. खास करके आज के जमाने में mobile, internet आदि बहुत बढ़ गये है. इसमेंभी जबसे पोर्नोग्राफी की भरमार उसमे डालनी शुरू हुई की युवान इसमें फसते चले गए. क्योकि वे लोग बड़ी ही चालाकी से उनका प्रचार भी करते है.

Brahmacharya practice

अच्छी वीडियो देखो या कोई साईट पढो उसमे ये लोग चुपकिदी से अपना गार्बेज दाखिल कर देते है. युवान एक बार उसे देख ले की तुरत उसे बार बार देखने की लत लग जाती है. फिर तो ये एक habits में तबदील हो जाता है. उनका शिकार हुवा युवान अपना होस हवास खो बैठता है. उन्हें देखनेके बाद वह masturbation आदि का शिकार हो जाता है.

धीरे धीरे अपनी काफी सारी शक्ति नष्ट कर देता है. उन्ही को रोकने के लिए एक nofap संगठनभी बनाया गया है. जिनके जो सभ्य होते है वह porn देखने से और masturbation क्रिया से दूर रहते है. इस तरह से वर्तमान समय को देखते हुवे ये साधना बहुत ही important है. हलाकि ब्रह्मचर्य का अर्थ तो बहुत ही विशाल है. इसलिए प्रथम उनको भी यहा पर समजेगे. लेकिन जैसे कोई कुछ न कर शके उनके बदले इतना कर शके तो भी बहुत है. शुध्धता के लिए यह एक शुरुआत है. फिरभी मूल अर्थ को हमे नही भूलना चाहिए

ब्रह्मचर्य का सही अर्थ-meaning of Brahmacharya-meaning of celibacy

ब्रह्मचर्य दो शब्द से बना हुवा एक शब्द है. ब्रह्म मतलब वैश्विक चेतना cosmic energy परमात्मा, भगवान जो भी हम दिव्य चेतना को पुकारे वह..उनके द्वारा ये सारा जग उत्पन्न हुवा है. वह शक्ति जो पूरी दुनिया को चलाती है. जो उत्पन्नकर्ता, पालनकर्ता और नाशकर्ता है उसमे “चर्या” करना मतलब उनमे रहना.

इस तरह से रहना की उनकी अनुभूति सहज होती रहे. हमारे जीवन में निरंतर चेतना का अहेसास हो. हम जहा है वही पर हमे आनंद मिलने लगे. कोई शरती आनंद नही लेकिन जो अपने आप में ही आनंदित रहे. पूर्णता, आनंद और चेतना के अनुभव में वह किसी पर आधारित न रहे. हर मनुष्य अपने आपमें ही परमतत्व का स्वरूप है.

self awareness के साथ सम्बन्ध

आजकल लोग self awareness के नाम से इसे समजने लगे है. अपनी चेतनामें रहना और जो कुछ करते है उसमे द्रष्टा के भाव में रहना.नवीनता की बात तो यह है की इस तरह से रहने से जीवन के काफी सारी प्रश्न हल हो जाते है. मनुष्य अपने जीवन में भी सफल होता है और उसे निरंतर आनंद की अनुभूति भी होती है. लेकिन वह इद्रिय में मतलब की आख, कान आदि में इतना उलज न जाये की अपना होस हवाश ही खो बैठे.

थोडा आनंद बादमे घोर अंधेरा

खास करके ये जो विषय है वह बहुत ही ज्यादा अँधेरा फेलाने वाला है. इसमें जो चला जाये वह ब्लेक होल में घुसे हवाई जहाज की तरह जल्दी से बहार निकल नही शकता. इसमें जी जब बात कुत्रिम sex की हो मतलब की एक तरह का जो होता नही लेकिन फिर भी जैसे वो कुछ आनंद देता है ऐसा लगता हो ये मानसिक स्थिती खड़ी करता है.

जिसमे थोड़े पल के लिए तो आनंद लगे लेकिन पीछे केवल शक्ति का व्यय और मनः स्थिती की निम्नता के सिवा कुछ नही मिलता. इसलिए आज के समयमें इस विषय पर बहुत ध्यान देने की आवयश्कता है. In short हम यहा पर यह कह शकते है की हम जब पूर्ण चेतना में रहते है तब हम ब्रह्मचर्य में है ऐसा कह शकते है. यहा पर बिना आधार के ही निरंतर आनंद मिलने लगता है.

ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करे-brahmacharya rules in hindi

ब्रह्मचर्य का पालन करने के कुछ नियम है जिसे पालन करने से उनका पालन कर शकते है.

  1. जब तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हो तब सात्विक आहार का सेवन करना होगा उसमे ज्यादा मात्र में फल सब्जी ज्यादा हो, वह पुष्ट करने वाला हो और ज्यादा मरी मसाला युक्त न हो.
  2. अच्छे लोगो के साथ संग करना ऐसे दोस्तों के साथ बहुत नही मिलना जुलना जो गलत बाते करता हो. क्यों की सोबत का प्रभाव जायदा पड़ता है हमारे जीवनमे.
  3. अश्लील चित्र, द्रश्य, फिल्म, porn आदि बिलकुल बंध करना क्योकि इनसे पूरा मन विपरीत संस्कारो से युक्त हो जाता है. शुरू शुरू में ये बहुत ही अल्प मात्रा में pleasure देता हो ऐसा लगता है. लेकिन एक बार इस चक्कर में पड़ने के बाद बहार निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. यहा पर माइंड पूरा सिकुड़ जाता है. क्योकि ये दल दल की तरह है.
  4. इस लिए प्रथम से ही ध्यान रखना चाहिए. मनमे जबभी गलत सोच उभरे की उसे निर्मूल करना है. या कोई अन्य रचनात्मक क्रिया ये करनी है. व्यायाम कर शकते है.
  5. कड़ी महेनत करनी चाहिए. अच्छी किताबो का वाचन, दिव्य सत्संग आदि करने से भी मन एकदम शुध्ध हो जाता है. ध्यान, योग, प्राणायाम आदि करते रहने से भी मन की प्रफुल्लितता बढती है और व्यक्ति को भीतर से आनंद प्रगट होने लगता है.
  6. इसलिए उस दिशा में मन जाता नही है. यह कायमिक हल है उनका क्योकि जब तक आप अपनी चेतना के स्टेज पर उपर नही उठोगे तब तक ये दिव्यता मिलनी मुश्किल है. क्योकि थोड़े समय तक आप ये कर शकेगे लेकिन फिरसे यही सोच उभर कर आएगी.

यहा पर एक बात खास याद रखनी है-Brahmacharya palan ke upay

यहा पर ये बात याद रखनी है की दबाव से नही लेकिन समजपूर्वक ये सब करना है तब ही ये सहज हो जायेगा. जब तक ये सहज न हो तब तक उनका भार मनमे लगते रहेगा और बार बार मन वहा पर जाता रहेगा.

क्योकि मन का एक स्वभाव है की अगर आप उसे नही करने को कहोगे तो ये ज्यादा करने लगेगा. इसलिए हमारी भूमिका ही उपर उठानी है नियमित ध्यान, प्राणायाम और योग के अभ्यास से ये हो शकता है.

तत्व चिन्तन मतलब की एक दिव्य ध्यान से भी ये सहज हो शकता है. स्त्री में कोई दोष नही ये बात याद रखनी है लेकिन दोष जो वासना युक्त चिन्तन उठता है इसमें है. इसलिए उसके स्थान पर दिव्य चिंतन करना है.

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